क्या आप परेशान है ? यदि आपको तंत्र मंत्र ज्योतिष की किसी भी प्रकार की समस्या है तो आप गुरू जी से Mobile अथवा Whats App पर संपर्क कर सकते है ! Mobile No. +919509989296    Whats App +919509989296
vashikaran specialist in kamakhya tarapith haridwar ujjain

vashikaran specialist aghori baba tantrik in ujjain

साबर लक्ष्मी साधना

यह एक महत्वपूर्णसाधना है, जब लक्ष्मी प्राप्ति के सभी प्रयत्न विफल हो जाते है, तो साधक अपना मनोरथ इस साधना के माध्यम से अवश्य पूरा कर सकता है | इसके लिए हमारे ऋषि मुनियों ने अनेक साधना प्रयोग दिए है | इन साधनाओ में साधना सामग्री की इतनी आवश्यकता तो नहीं होती फिर भी अगर आप साबर सिद्धि यंत्र य़ा श्री दत्तात्रेय यंत्र अथवा श्रीयंत्र अपने पास रख ले तो ज्यादा उचित रहता है | यहाँ मैं लक्ष्मी जी की एक अद्भुत  साधना दे रहा हू | इसे आप कभी भी सिद्ध कर सकते हैं | फिर भी नवरात्री से दीपावली तक का समय बहुत ही उचित है | या जिस दिन रोहणी नक्षत्र हो उस दिन शुरू करे तो सफलता का शांशय  नहीं रहता और पूर्णमा को इस मन्त्र से हवन भी कर सकते है | हवन सामग्री में घी मेवे और कमलगट्टे शकर मिला सकते है | इसका हवन खुले असमान के नीचे करना है | बंद कमरे में नहीं अगर स्थान  पर्याप्त ना हो तो किसी भी मंदिर में जाकर कर सकते हैं | वहां के पंडित को बोल दे वोह कुछ दक्षिणा ले कर हवन का प्रबंध  कर देगा लेकिन मंत्र गुप्त रखे | इस साधना में लक्ष्मी को सौगंध दी जाती है कि वह हमेशा आप के घर परिवार पर अपनी कृपा बरसाती रहे और हमेशा आपके कार्यो को जो धन की वजह से रुक गये हो उन्हे  पूरा करती रहें और प्रत्यक्ष हो कर आपके कार्य को सहयोग दे यह मन्त्र भी नाथ सम्प्रदाय की साधनाओं में आता है और अपने आप में काफी रहस्य संजोये हुए है || अब लाभ तो वही ले सकता है जो करेगा | 
आप इस रहस्य से भी परिचित हो लक्ष्मी सागर मंथन से प्रकट हुई जिसे नारायण जी ने वरा और लक्ष्मी के साथ चन्द्र और अप्सराये भी सागर मंथन से प्रकट हुई ! चन्द्र को भगवान शंकर जी ने धारण किया और अप्सराये इंद्र सभा को सोंप  दी गई | इस नाते चंदमा लक्ष्मी का भाई है | इन्सान को जब भी जरूरत पड़ी है वोह किसी ना किसी प्रयत्न  से उस स्थिति को पाना चाहता है | जिस में उसे श्रेष्ठता  मिले और दुसरो  का मोहताज ना बने इस लिए कई सिद्ध योगियों ने प्रयत्न  कर ऐसी साधना विधियों का निर्माण किया जो उसे एक श्रेष्ठ  तत्व प्रदान  कर लघु से महान बनाती है | विज्ञानं के युग में समय के साथ वह क्रियाये लुप्त होती गई और इन्सान इसी अध्यात्म की कमी से आर्थिक और भौतिक पक्ष से कमजोर होता गया | असुरो ने मंत्रो से बहुत ही महान सिद्धि कर ली और देवताओं से से उनके अधिकार छीन लिए तो शंकर जी को सभी मन्त्र कीलित करने पड़े और इसी से काफी प्रयत्न के बाद जब सिद्धि  नहीं हुई तो ऋषियों ने उत्कीलन की प्राप्ति के लिए तप  किया और नाथ पंथ के योगियों जिनमें श्री गोरख नाथ जी बहुत श्रेष्ठ  सिद्ध पुरुष हुए है | उन्हों ने साबर मंत्रो की रचना की और सिद्धिओ को और भी सुगम बना दिया जही से साबर रहस्य शुरू होता है | अलग अलग सम्प्रदायों में  अलग अलग विधान है | यहाँ यह साधना प्रयोग दे रहा हू इस से मैं यह तो नहीं कहता के लक्ष्मी आपके समक्ष प्रकट हो जाएगी मगर धन के नये नये आयाम बन जायेगे और सुख सुविधा से आपका घर भर जरुर जायेगा | क्यों के सभी सुख लक्ष्मी का रूप होते है |


विधि ---
इसे आप रोहणी नक्षत्र में शुरू करे, यह २१ दिन की साधना है |
कमलगट्टे की माला से २१ माला मन्त्र जपना है |
वस्त्र वही पहने जो आपको अच्छे लगते  हो आप काला रंग छोड़ कर सभी किस्म के वस्त्र पहन सकते हैं |
साधना समय शाम ७ वजे से रात्रि १० वजे तक कभी भी कर सकते है |
अपने सामने एक बेजोट पे पीला वस्त्र बिछा कर उस पर  श्री यंत्र स्थापित कर ले और उसी का पूजन करे गुरु पूजन और गणेश पूजन के बाद नव नाथो को नमस्कार करे य़ा आदेश बुलाये | अगर मिल जाये तो श्री दतात्रय यंत्र की स्थापना  जरुर कर ले इस का कोई दोष भी नहीं लगता और पूजा भी आसान है उल्टा सीधा जैसा भी 
फिर कमलगट्टे की माला से २१ माला मन्त्र जप कर ले उसी माला से पहले और बाद में एक एक माला गुरु मन्त्र की जरुर करे | मन्त्र छोटा सा है इस में ज्यादा समय नहीं लगेगा !
घी का दीपक जा ज्योत लगा ले और अगरवती अदि लगा दे !

साबर मन्त्र --- 
|| ॐ सागर सुता नरायण की प्यारी चन्द्र भराता की सोगंध हाजर हो ||

 

तीव्र विद्वेषण प्रयॊग

यह प्रयॊग आप कृष्ण पक्ष शनिवार रात्रि से आरम्भ करे यह प्रयॊग ४० दिन का है किन्तु जादा समय नहीं लगता, स्नान कर साफ़ धोती धारण कर अपने साधना कक्ष में दक्षिण- पश्चिम दिशा के मध्य मुह कर काले ऊनी आसन पर बैठ जाए बैठने का तरीका स्वस्तिकासन में होना चाहिए ! अपने सामने गणेश -गुरु और अपने इष्ट को विराजमान कर सर्व प्रथम आचमन - पवित्रीकरण आदि कर दाए हाथ में जल लेकर संकल्प करे - मैं अमुक नाम का साधक अमुक तिथी - गोत्र अमुक जातक का अमुक व्यक्ति के मध्य द्वेष उत्पन्न करने के उद्देश से मैं विद्वेषण प्रयॊग कर रहा हु ! संकल्प करने के बाद गणेश -गुरु -इष्ट का पूजन कर गुरु मंत्र कर ले .. और प्रयॊग में पूर्ण सफलता की प्रार्थना कर काली हकीक माला का संक्षिप्त पूजन कर उपांशु विधि से मात्र ४ माला निम्न मंत्र की करे -

 

मंत्र :-

ॐ नमो नारदाय अमुकस्य अमुकेन सह विदवेषण कुरु कुरु स्वाहा ॥

इसमें ( अमुकस्य ) के स्थान पर एक व्यक्ति का नाम बोले और उसकी लडाई जिससे करानी हो ( अमुकेन ) के स्थान पर उसका नाम बोले ! मंत्र का जप न तो बहुत शीघ्रता से करे और न ही बहुत धीमे -धीमे ! नित्य मंत्र जप के बाद अपने इष्ट की आरती कर शमा याचना अवश्य करे ! ऐसा करने पर अवश्य ही उन दोनों के मध्य किसी बात को लेकर द्वेष उत्पन्न हो जाता है और वह एक दूसरे का मुह तक देखना पसंद नहीं करते !

अंत में यही कहना चाहूगा की गलत उद्देश से किया तंत्र प्रयॊग साधक के लिए ही घातक हो जाता है अतः साधक अपने विवेक का प्रयॊग करे !!

महागौरी साधना

यह सिर्फ एक दिवसीय प्रयोग है,साधक का मुह पूर्व की और हो,सामने शिव-शक्ति चित्र,सवेरे ब्रम्ह-मुहूर्त पर रुद्राक्ष/मूंगा/लाल हकीक माला से २१ माला मंत्र जाप आवश्यक है,और रात्रि मे इसी मंत्र से ३ माला मंत्र जाप आहुती यज्ञ भगवान को समर्पित कीजिये,हवन के बाद मिठाई का प्रसाद छोटे बच्चो मे बाट दीजिये,आसन-वस्त्र जो भी आपके पास हो वही साधना मे रहे तो अच्छी बात है,सच्चाई तो यह है के इस मंत्र को लक्ष्मी वशीकरण मंत्र ही मानते है और यह शीघ्र इच्छापूर्ति साधना भी है,

 

 विनियोग

 ॥ अस्य श्री गौरी मंत्रस्य अजऋषी: निवृदगायत्री छन्द: गौरी देवता ह्रीं बीजं , स्वाहा शक्ति: मम अखिलकार्य सिद्धये महालक्ष्मी प्राप्तर्थे जपे विनियोग: ॥

 अपने हृदय मे माँ भगवती जी का ध्यान करे ताकि आप शक्ति-तत्व युक्त बन सके॰ध्यान मंत्र ११ बार बोलना है,

 ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।

     शरण्य त्र्यंबके गौरी नारायणी नामोस्तुते॥

 मंत्र- ॥ ऐं ह्रीं श्रीं आद्दलक्ष्मी महागौरी शिवशक्ति ह्रीं नम: ॥

यह शिव-सायुज्य महागौरी मंत्र है,इस मंत्र का प्रभाव २४ घंटे मे ही दिखाई देता है, इस साधना के प्रभाव से वशीकरण साधना मे शीघ्र सफलता प्राप्त होती है,चेहरे पे तेज आ जाता है,आंखो मे सम्मोहन शक्ति विद्यमान हो जाती है,साधना समाप्ती के बाद माँ भगवती जी के श्री-चरनोमे एक लाल रंग का पुष्प मंत्र बोलकर समर्पित कीजिये,हो सके तो शिव-सायुज्य महागौरी मंत्र का जाप नित्य दैनिक साधना मे २१ बार कीजिये यही मेरा आपसे निवेदन है......

पुष्पांजलि -

अभीष्ट सिद्धिम मे देही शरणागत वस्तले ।

भक्त्या सवर्पये तुभ्यं पुष्पात्र्जली तवार्यनम ॥

 

सर्व सिद्धि दायक यक्षिणी साधना

यक्षिणी साधना जहां धन देती है वही आपकी कामना पूर्ति भी करती है | जीवन में आ रही प्रेशनियों को सहज समझ कर उनका निवारण करने का गुण प्रदान करती है | एक सच्चे मित्र की तरह साथ देती हुई साधक का हर प्रकार से मंगल करती है | यक्षिणीये माता की सहचरिए होती है और साधक की साधना में निखार ला देती है | सही मैयने में देखा जाए तो यक्षिणी साधना जीवन में बसंत ऋतु के समान है | जब साधक निरंतर साधना करते हुए ऊर्जा को सहन करते करते मन से कुश तपस के कारण ऊब सा जाता है या  यह कहू के तेज को सहन करने की वजह से कई वार मन की स्थिति ऐसी हो जाती है के उसके लिए जीवन में मन में एक विराग पैदा होने से उदासी सी आ जाती है | ऐसे वक़्त में यक्षिणी उसे नई उमंग देते हुए मन को आनंद से भर देती है | उसके जीवन में वर्षा की फुयार की तरह कार्य करती है | जब साधक आनंद से सराबोर होता है तो साधना करने की ललक उसे जीवन में और शक्ति अर्जित करने को प्रेरत करती है |  यह साधक के जीवन में प्रेम को समझने का गुण पैदा करती है | उसके जीवन को धन धन्य आदि सुख प्रदान करती है | धनदा यक्षिणी की साधना मंत्र शाश्तरों में नाना प्रकार से दी हुई है | जीवन में सवर्ण क्षण होते है जब साधक किसी यक्षिणी का सहचर्या प्राप्त करता है | यक्षिणी साधना दुर्लव है पर दुष्कर नहीं यह सहज ही संपन हो जाती है बस इसे समझने की जरूरत है |जो साधक जीवन में धन आदि सुख चाहते है उन्हे यह साधना संपन करनी चाहिए और यह साधना साधक के मन में साधना के प्रति प्रेरणा पैदा करती है |                         
जहां मैं धनदा यक्षिणी की साधना दे रहा हु आशा करता हु यह साधना आपके जीवन को जरूर नई दिशा देगी इस के लिए साधना के नियमो की पालना करनी अनिवर्य है | यक्षिणी रूप सोंद्र्य से परिपूर्ण होती है यह साधक का काया कल्प तक कर देती है | धनदा यक्षिणी 20 -22 वर्ष की सोंद्र्य की मूर्ति है |इसकी आंखे झील सी गहराई लिए हुई नीली दिखाई देती है | गोर वरणीय मुख के दोनों तरफ दो वालों की वल खाती दो लटाए और लंबी वेणी वालो पे कजरा सा लगाए सुंदर रूप चंद्रमा जैसा जिस सोंद्र्य की आप कल्पना भी नहीं कर सकते उसके वारे अधिक कुश नहीं कह सकता और प्रेम से मन को प्रफुल्त सी करती हुई जब आपके साहमने आती है तो उस वक़्त कैसा मंजर होता है यह आप स्व कर के देख ले |


विधि –

  १. यह साधना 21 दिन की है | 21 दिन में स्वा लाख मंत्र जप जरूरी है | 
  २. इसके लिए दो सामग्री  यक्षिणी  यंत्र और यक्षिणी माला , अगर सामग्री न हो तो इसे करने के लिए एक लाल वस्त्र पे यक्षिणी की नारी रूप की सुंदर तस्वीर बना कर अथवा मूर्ति आदि बना कर भी की जा सकती है यह साधको को सुविदा के लिए बता रहा हु जा आप सफटिक या  पारद  श्री यंत्र पे भी इसका प्रयोग कर सकते हैं | माला अगर यक्षिणी माला न हो तो लाल चन्दन की माला श्रेष्ठ रहती है |
  ३. वस्त्र पीले अनसिले पहने  मतलव आप पीली धोती और पीतांबर ले सकते है |
  ४. दिशा उतर ठीक है |
  ५. मंत्र जप २१ दिन में स्वा लाख करना है |
  ६. गुरु जी और गणेश जी का पंचौपचार पूजन करे साधना के लिए अनुमति ले फिर यक्षिणी यंत्र जो के अपने साहमने एक बेजोट पे पीला जा लाल वस्त्र विशा के स्थाप्त करना है उसका पूजन करे | पूजन में धूप, दीप , फल, फूल, अक्षत, नवेद आदि के लिए मिठाई जो दूध की बनी हो और इतर आदि चढ़ा कर पुजा करे |
  ७. पूजन के बाद आप गुरु मंत्र जाप ५ माला कर ले तो बेहतर है नहीं तो २ माला  पहले और २ माला बाद में कर ले |
  ८. घी का दीपक पुजा काल के दोरान जलता रहे | सुगंध आदि के लिए अगरवती आदि लगा दे |फिर आप मंत्र जाप करे और जप पूर्ण होने पर जप समर्पित सद्गुरु जी अथवा यक्षिणी यंत्र पे भी कर सकते है |
  ९. साधना शुरू करने से पहले कुबेर देवता का पूजन अवश्य करे इस से साधना में सफलता की सभावना बढ़ जाती है |

मंत्र – 

|| ॐ धं ह्रीं श्रीं रतिप्रिये स्वाहा || 

यह नौ अक्षर का मंत्र है इसका स्वा लाख जप करने से साधक को शीर्घ ही सिद्धि प्राप्त होती है |

 

श्री तारा महाविद्या प्रयोग

सृष्टि की उत्तपत्ति से पहले घोर अन्धकार था, तब न तो कोई तत्व था न ही कोई शक्ति थी, केवल एक अन्धकार का साम्राज्य था,इस परलायाकाल के अन्धकार की देवी थी काली, उसी महाअधकार से एक प्रकाश का बिन्दु प्रकट हुआ जिसे तारा कहा गया, यही ताराअक्षोभ्य नाम के ऋषि पुरुष की शक्ति है, ब्रहमांड में जितने धधकते पिंड हैं सभी की स्वामिनी उत्तपत्तिकर्त्री तारा ही हैं, जो सूर्य में प्रखरप्रकाश है उसे नीलग्रीव कहा जाता है, यही नील ग्रीवा माँ तारा हैं, सृष्टि उत्तपत्ति के समय प्रकाश के रूप में प्राकट्य हुआ इस लिए तारा नामसे विख्यात हुई किन्तु देवी तारा को महानीला या नील तारा कहा जाता है क्योंकि उनका रंग नीला है, जिसके सम्बन्ध में कथा आती है किजब सागर मंथन हुआ तो सागर से हलाहल विष निकला, जो तीनों लोकों को नष्ट करने लगा, तब समस्त राक्षसों देवताओं ऋषि मुनिओंनें भगवान शिव से रक्षा की गुहार लगाई, भूत बावन शिव भोले नें सागर म,अन्थान से निकले कालकूट नामक विष को पी लिया, विष पीतेही विष के प्रभाव से महादेव मूर्छित होने लगे, उनहोंने विष को कंठ में रोक लिया किन्तु विष के प्रभाव से उनका कंठ भी नीला हो गया, जबदेवी नें भगवान् को मूर्छित होते देख तो देवी नासिका से भगवान शिव के भीतर चली गयी और विष को अपने दूध से प्रभावहीन कर दिया,किन्तु हलाहल विष से देवी का शरीर नीला पड़ गया, तब भगवान शिव नें देवी को महानीला कह कर संबोधित किया, इस प्रकार सृष्टिउत्तपत्ति के बाद पहली बार देवी साकार रूप में प्रकट हुई, दस्माहविद्याओं में देवी तारा की साधना पूजा ही सबसे जटिल है, देवी के तीनप्रमुख रूप हैं
१) उग्रतारा २) एकाजटा और ३) नील सरस्वती
देवी सकल ब्रह्म अर्थात परमेश्वर की शक्ति है, देवी की प्रमुख सात कलाएं हैं जिनसे देवी ब्रहमांड सहित जीवों तथा देवताओं की रक्षा भीकरती है ये सात शक्तियां हैं
१) परा २) परात्परा ३) अतीता ४) चित्परा ५) तत्परा ६) तदतीता ७) सर्वातीता
इन कलाओं सहित देवी का धन करने या स्मरण करने से उपासक को अनेकों विद्याओं का ज्ञान सहज ही प्राप्त होने लगता है, देवी ताराके भक्त के बुद्धिबल का मुकाबला तीनों लोकों मन कोई नहीं कर सकता, भोग और मोक्ष एक साथ देने में समर्थ होने के कारण इनकोसिद्धविद्या कहा गया है |

देवी तारा ही अनेकों सरस्वतियों की जननी है इस लिए उनको नील सरस्वती कहा जाता हैदेवी का भक्त प्रखरतम बुद्धिमान हो जाता हैजिस कारण वो संसार और सृष्टि को समझ जाता हैअक्षर के भीतर का ज्ञान ही तारा विद्या हैभवसागर से तारने वाली होने के कारण भीदेवी को तारा कहा जाता हैदेवी बाघम्बर के वस्त्र धारण करती है और नागों का हार एवं कंकन धरे हुये हैदेवी का स्वयं का रंग नीला है औरनीले रंग को प्रधान रख कर ही देवी की पूजा होती हैदेवी तारा के तीन रूपों में से किसी भी रूप की साधना बना सकती है समृद्ध,महाबलशाली और ज्ञानवानसृष्टि की उतपाती एवं प्रकाशित शक्ति के रूप में देवी को त्रिलोकी पूजती हैये सारी सृष्टि देवी की कृपा से हीअनेक सूर्यों का प्रकाश प्राप्त कर रही हैशास्त्रों में देवी को ही सवित्राग्नी कहा गया हैदेवी की स्तुति से देवी की कृपा प्राप्त होती है |

स्तुति . . .
प्रत्यालीढ़ पदार्पिताग्ध्रीशवहृद घोराटटहासा पराखड़गेन्दीवरकर्त्री खर्परभुजा हुंकार बीजोद्भवा,खर्वानीलविशालपिंगलजटाजूटैकनागैर्युताजाड्यन्न्यस्य कपालिके त्रिजगताम हन्त्युग्रतारा स्वयं

देवी की कृपा से साधक प्राण ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ भोग और मोक्ष दोनों प्राप्त करता हैगृहस्थ साधक को सदा ही देवी की सौम्यरूप में साधना पूजा करनी चाहिएदेवी अज्ञान रुपी शव पर विराजती हैं और ज्ञान की खडग से अज्ञान रुपी शत्रुओं का नाश करती हैंलाल वनीले फूल और नारियल चौमुखा दीपक चढाने से देवी होतीं हैं प्रसन्नदेवी के भक्त को ज्ञान व बुद्धि विवेक में तीनो लोकों में कोई नहीं हरापतादेवी की मूर्ती पर रुद्राक्ष चढाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती हैमहाविद्या तारा के मन्त्रों से होता है बड़े से बड़े दुखों का नाश |

देवी माँ का स्वत: सिद्ध महामंत्र है. . .
श्री सिद्ध तारा महाविद्या महामंत्र
" ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट "


इस मंत्र से काम्य प्रयोग भी संपन्न किये जाते हैं जैसे
1. बिल्व पत्र, भोज पत्र और घी से हवन करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है
2.मधु. शर्करा और खीर से होम करने पर वशीकरण होता है
3.घृत तथा शर्करा युक्त हवन सामग्री से होम करने पर आकर्षण होता है।
4. काले तिल व खीर से हवन करने पर शत्रुओं का स्तम्भन होता है।
देवी के तीन प्रमुख रूपों के तीन महा मंत्रमहाअंक-देवी द्वारा उतपन्न गणित का अंक जिसे स्वयं तारा ही कहा जाता है वो देवी कामहाअंक है -"1"विशेष पूजा सामग्रियां-पूजा में जिन सामग्रियों के प्रयोग से देवी की विशेष कृपा मिलाती हैसफेद या नीला कमल का फूलचढ़ानारुद्राक्ष से बने कानों के कुंडल चढ़ानाअनार के दाने प्रसाद रूप में चढ़ानासूर्य शंख को देवी पूजा में रखनाभोजपत्र पर ह्रीं लिख कराचढ़ानादूर्वा,अक्षत,रक्तचंदन,पंचगव्य,पञ्चमेवा व पंचामृत चढ़ाएंपूजा में उर्द की ड़ाल व लौंग काली मिर्च का चढ़ावे के रूप प्रयोग करेंसभीचढ़ावे चढाते हुये देवी का ये मंत्र पढ़ें-

" ॐ क्रोद्धरात्री स्वरूपिन्ये नम: "
१) देवी तारा मंत्र - ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट
२) देवी एक्जता मंत्र - ह्रीं त्री हुं फट
३) नील सरस्वती मंत्र - ह्रीं त्री हुं
सभी मन्त्रों के जाप से पहले अक्षोभ्य ऋषि का नाम लेना चाहिए तथा उनका ध्यान करना चाहिएसबसे महत्पूरण होता है देवी का महायंत्रजिसके बिना साधना कभी पूरण नहीं होती इसलिए देवी के यन्त्र को जरूर स्थापित करे व पूजन करेंयन्त्र के पूजन की रीति है-पंचोपचारपूजन करें-धूप,दीप,फल,पुष्प,जल आदि चढ़ाएं, " ॐ अक्षोभ्य ऋषये नम: मम यंत्रोद्दारय-द्दारय" कहते हुये पानी के 21 बार छीटे दें वपुष्प धूप अर्पित करेंदेवी को प्रसन्न करने के लिए सह्त्रनाम त्रिलोक्य कवच आदि का पाठ शुभ माना गया हैयदि आप बिधिवत पूजा पातनहीं कर सकते तो मूल मंत्र के साथ साथ नामावली का गायन करेंतारा शतनाम का गायन करने से भी देवी की कृपा आप प्राप्त कर सकतेहैंतारा शतनाम को इस रीति से गाना चाहिए-
"तारणी तरला तन्वी तारातरुण बल्लरी,तीररूपातरी श्यामा तनुक्षीन पयोधरा,तुरीया तरला तीब्रगमना नीलवाहिनी,उग्रतारा जया चंडीश्रीमदेकजटाशिरा"
देवी को अति शीघ्र प्रसन्न करने के लिए अंग न्यास व आवरण हवन तर्पण व मार्जन सहित पूजा करेंअब देवी के कुछ इच्छा पूरक मंत्र
1) देवी तारा का भय नाशक मंत्र "ॐ त्रीम ह्रीं हुं" नीले रंग के वस्त्र और पुष्प देवी को अर्पित करेंपुष्पमाला,अक्षत,धूप दीप से पूजनकरेंरुद्राक्ष की माला से 6 माला का मंत्र जप करेंमंदिर में बैठ कर मंत्र जाप से शीघ्र फल मिलता हैनीले रग का वस्त्र आसन के रूप में रखें याउनी कम्बल का आसन रखेंपूर्व दिशा की ओर मुख रखेंआम का फल प्रसाद रूप में चढ़ाएं
2) शत्रु नाशक मंत्र "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: हुं उग्रतारे फट" नारियल वस्त्र में लपेट कर देवी को अर्पित करेंगुड से हवन करेंरुद्राक्ष की माला से 5माला का मंत्र जप करेंएकांत कक्ष में बैठ कर मंत्र जाप से शीघ्र फल मिलता हैकाले रग का वस्त्र आसन के रूप में रखें या उनी कम्बल काआसन रखेंउत्तर दिशा की ओर मुख रखेंपपीता का फल प्रसाद रूप में चढ़ाएं
3) जादू टोना नाशक मंत्र "ॐ हुं ह्रीं क्लीं सौ: हुं फट" देसी घी ड़ाल कर चौमुखा दीया जलाएंकपूर से देवी की आरती करेंरुद्राक्ष की माला से 7माला का मंत्र जप करें
4) लम्बी आयु का मंत्र "ॐ हुं ह्रीं क्लीं हसौ: हुं फट" रोज सुबह पौधों को पानी देंरुद्राक्ष की माला से 5 माला का मंत्र जप करेंशिवलिंग केनिकट बैठ कर मंत्र जाप से शीघ्र फल मिलता हैभूरे रग का वस्त्र आसन के रूप में रखें या उनी कम्बल का आसन रखेंपूर्व दिशा की ओरमुख रखेंसेब का फल प्रसाद रूप में चढ़ाएं
5) सुरक्षा कवच का मंत्र "ॐ हुं ह्रीं हुं ह्रीं फट" देवी को पान व पञ्च मेवा अर्पित करेंरुद्राक्ष की माला से 3 माला का मंत्र जप करेंमंत्र जाप केसमय उत्तर की ओर मुख रखेंकिसी खुले स्थान में बैठ कर मंत्र जाप से शीघ्र फल मिलता हैकाले रग का वस्त्र आसन के रूप में रखें या उनीकम्बल का आसन रखेंउत्तर दिशा की ओर मुख रखेंकेले व अमरुद का फल प्रसाद रूप में चढ़ाएंदेवी की पूजा में सावधानियां व निषेध-बिना"अक्षोभ ऋषि" की पूजा के तारा महाविद्या की साधना न करेंकिसी स्त्री की निंदा किसी सूरत में न करेंसाधना के दौरान अपने भोजनआदि में लौंग व इलाइची का प्रयोग नकारेंदेवी भक्त किसी भी कीमत पर भांग के पौधे को स्वयं न उखाड़ेंटूटा हुआ आइना पूजा के दौरानआसपास न रखें

alt         alt

Note - नीचे मंत्र साधनायें लिखी गई है कोई भी मंत्र साधना पढ़ने के लिये उस मंत्र पर क्लिक करे ☟

vashikaran specialist aghori baba in ujjain

vashikaran specialist real aghori tantrik in ujjain

vashikaran specialist astrologer in ujjain

vashikaran specialist aghori tantrik baba in ujjain

Real aghori baba in ujjain

dus maha vidhya sadhak in ujjain

Black Magic specialist in ujjain

worlds no 1 aghori tantrik in ujjain

worlds no 1 aghori baba in ujjain

White Magic specialist in ujjain

love marriage specialist in ujjain

love problem solution in ujjain

love guru in ujjain

no 1 aghori tantric baba in ujjain

famous aghori tantrik in Ujjain real aghori tantrik in Ujjain real aghori baba in Ujjain Best aghori tantrik in Ujjain No 1 tantrik in Ujjain number one tantrik in Ujjain tantrik guru in Ujjain black magic specialist in Ujjain bengali aghori tantrik in Ujjain world famous tantrik in Ujjain shamshan sadhak in Ujjain dus mahavidhya tantrik in Ujjain dus mahavidhya sadhak in Ujjain dusmahavidhya tantrik in Ujjain dusmahavidhya sadhak in Ujjain love marriage specialist tantrik in Ujjain love marriage expert tantrik in Ujjain love marriage specialist baba in Ujjain love marriage expert baba in Ujjain love marriage specialist aghori tantrik in Ujjain love marriage expert aghori tantrik in Ujjain love marriage specialist aghori baba in Ujjain love marriage expert aghori baba in Ujjain vashikaran specialist in Ujjain vashikaran specialist tantrik in Ujjain vashikaran specialist baba in Ujjain vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain vashikaran specialist aghori baba in Ujjain love vashikaran specialist in Ujjain love vashikaran specialist tantrik in Ujjain love vashikaran specialist baba in Ujjain love vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain love vashikaran specialist aghori baba in Ujjain No 1 tantrik in Ujjain number one tantrik in Ujjain Girlfriend vashikaran specialist in Ujjain Girlfriend vashikaran specialist tantrik in Ujjain Girlfriend vashikaran specialist baba in Ujjain Girlfriend vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain Girlfriend vashikaran specialist aghori baba in Ujjain boyfriend vashikaran specialist in Ujjain boyfriend vashikaran specialist tantrik in Ujjain boyfriend vashikaran specialist baba in Ujjain boyfriend vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain boyfriend vashikaran specialist aghori baba in Ujjain wife vashikaran specialist in Ujjain wife vashikaran specialist tantrik in Ujjain wife vashikaran specialist baba in Ujjain wife vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain wife vashikaran specialist aghori baba in Ujjain husband vashikaran specialist in Ujjain husband vashikaran specialist tantrik in Ujjain husband vashikaran specialist baba in Ujjain husband vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain husband vashikaran specialist aghori baba in Ujjain stri vashikaran specialist in Ujjain stri vashikaran specialist tantrik in Ujjain stri vashikaran specialist baba in Ujjain stri vashikaran specialist aghori tantrik in Ujjain stri vashikaran specialist aghori baba in Ujjain vashikaran love spells in Ujjain vashikaran love spells specialist in Ujjain vashikaran love spells expert in Ujjain voodoo spells in Ujjain voodoo spells specialist in Ujjain voodoo spells expert in Ujjain love spell in Ujjain love spell specialist in Ujjain love spell expert in Ujjain money spells in Ujjain money spells specialist in Ujjain money spells expert in Ujjain Astrologer in Ujjain vedic astrologer in Ujjain best astrologer in Ujjain vedic astrology in Ujjain no 1 astrologer in Ujjain Number 1 astrologer in Ujjain