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 साबर मोहनी जाल

साबर तंत्र में इस साधना को मोहनी जाल के नाम से जाना जाता है | इसका प्रयोग  कभी विफल नहीं जाता !इस से जहाँ अपने उच्च अधिकारी को अपने अनुकूल बना सकते है | वही अपने आस पास के वातावरण को अपने विरोध होने से  रोक सकते है | अपनी झगड़ालू पत्नी जा पति को भी अपने वश में  कर उसे अनुकूलता दे सकते है | कई लोग इस प्रयोग का गलत इस्तेमाल कर लेते है | उन्हें कहता हू कोई भी ऐसा कार्य ना करे जो समाजिक दृष्टि से अनुकूल ना हो | सिर्फ आवश्कता पड़ने पर ही यह प्रयोग करे  | यह प्रयोग जिज्ञाशा के लिए दे रहा हू | इस लिए इसे सद्कार्य हेतु इस्तेमाल करे नहीं तो शक्ति कई वार विपरीत स्थिति भी पैदा कर देती है | मोहनी जाळ फेकना आसन है, मगर उठाना उतना ही मुश्किल इस लिए  इसे इस्तेमाल करने से पहले पुनः  सोच विचार कर ले  | इस का प्रयोग  अति  शक्तिशाली है | इस से अपने प्रतिबंधिओ  को अपने अनुकूल कर मन चाहा कार्य संपन करा  सकते है | यह प्रयोग पहली  वार आपके समक्ष  ला रहा हू |

   साधना विधि --
१. इसे लाल वस्त्र धारण कर करना चाहिए |
२. आसन कुषा का जा कबल का ले सकते है |
३. दिशा उतर रहेगी |
४. मन्त्र जाप पाँच  माला करना है | इस के लिए लाल चन्दन जा कुंकुम की माला जा काले हकीक  की माला इस्तेमाल कर सकते है |
५ तेल का दीपक साधना काल में जलता रहेगा जब तक आप मन्त्र जाप करते है | दीपक में तिल का तेल इस्तेमाल करे तो जयादा उचित है |
६. सोलह किस्म का सिंगार ले आये उसे वेजोट पे लाल वस्त्र विछा के उस पर  रख दे और सात किस्म की मिठाई भी रख दे इस के  इलावा छोटी इलाची और एक शीशी  इतर पास रखे और एक मीठा पान का बीड़ा रख दे |
७. साधना के बाद छोटी इलाची और इतर को छोड़ कर शेष  समग्री किसी निर्जन स्थान  पे उसी लाल वस्त्र में बांध कर  छोड़ दे अथवा नदी में प्रवाहित करदे |
८. वशीकरन के लिए एक इलाची ७ वार यह मन्त्र पढ़  किसी को खिला दे |
९. जब आप किसी अधिकारी से मिलने जा रहे हो जो आपका कार्य नहीं कर रहा तो थोरा इतर लगा के चले जाये वोह आपकी बात जरुर सुनेगा |
१०. इसे २१ दिन करना है और मन शुद रखे |
११. सारी समग्री लाल वस्त्र पे रख के उस में तेल का दिया किसी पात्र में रख कर  लगा दे और मन्त्र जाप शुरू करने से पहले गणेश पूजन गुरु पूजन और श्री भैरव  पूजन अनिवर्य है |
१२. उस दिये  पे एक मिटी के  पात्र पर थोरा घी लगा  के दिये  से थोरा उचा रख सकते है | काजल उतरने के लिए !उस काजल से तीव्र  संमोहन होता है | उसे आँखों में लगा के जिसे भी देखेगे समोहित हो जायेगा !

साधना करते वक़्त ख्याल रखे कई वार मोहिनी भयानक रूप में साहमने आ जाती है | जिस के काले वस्त्र होते है और रंग काला होता है | होठो पे ढेर सारी सुर्खी लगी होती है | आंखे बिजली की तरह चमक रही होती है | ऐसी हालत में डरे न नहीं तो मेहनत बेकार हो जाती है | और ना ही उसकी आंखो में देखने का प्रयत्न करे नहीं तो आप समोहित हो जाएगे और साधना रुक जाएगी बहुत धार्य से काम ले जब तक वोह वर मांगने को न कहे तब तक बोले न सिर्फ अपने मंत्र जप पे ध्यान दे | जब आपका बचन हो जाए तो उसे कहे के जब भी मैं आपको याद कर इस मंत्र का जप कर जिसे समोहित करना चाहु कर सकु आप ऐसा वर दे इस से समोहन की शक्ति आपको दे देगी उसे सिंगार मिठाई पान आदि प्रदान करे वोह खुश हो कर आपको सकल स्मोहन का बचन दे देगी अगर ऐसा न भी हो तो भी मंत्र सिद्ध हो जाता है और कार्य करने लगता है | ऐसा सिर्फ इस लिए लिखा है के मेरा ऐसा अनुभव है | जो मैं समझता हु किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है | पर अक्सर मंत्र सिद्ध हो जाता है और कार्य करने लगता है | साधना के बाद आप इसके प्रयोग की पुष्टि कर सकते है | भूल कर भी गलत कार्यओ में इसका इस्तेमाल न करे इस का कई वार विपरीत परिणाम भी भुगतना पै सकता है |

 मंत्र ------
मोहिनी मोहिनी  मैं करा मोहिनी  मेरा नाम |
राजा  मोहा प्रजा  मोहा मोहा शहर ग्राम ||
त्रिंजन बैठी नार मोहा चोंके बैठी को |
स्तर बहतर जिस गली  मैं जावा सौ मित्र सौ वैरी को ||
वाजे मन्त्र फुरे वाचा |
देखा  महा मोहिनी  तेरे इल्म का तमाशा ||

 यक्षिणी साधना

यक्षिणी साधना जहां धन देती है वही आपकी कामना पूर्ति भी करती है | जीवन में आ रही प्रेशनियों को सहज समझ कर उनका निवारण करने का गुण प्रदान करती है | एक सच्चे मित्र की तरह साथ देती हुई साधक का हर प्रकार से मंगल करती है | यक्षिणीये माता की सहचरिए होती है और साधक की साधना में निखार ला देती है | सही मैयने में देखा जाए तो यक्षिणी साधना जीवन में बसंत ऋतु के समान है | जब साधक निरंतर साधना करते हुए ऊर्जा को सहन करते करते मन से कुश तपस के कारण ऊब सा जाता है या  यह कहू के तेज को सहन करने की वजह से कई वार मन की स्थिति ऐसी हो जाती है के उसके लिए जीवन में मन में एक विराग पैदा होने से उदासी सी आ जाती है | ऐसे वक़्त में यक्षिणी उसे नई उमंग देते हुए मन को आनंद से भर देती है | उसके जीवन में वर्षा की फुयार की तरह कार्य करती है | जब साधक आनंद से सराबोर होता है तो साधना करने की ललक उसे जीवन में और शक्ति अर्जित करने को प्रेरत करती है |  यह साधक के जीवन में प्रेम को समझने का गुण पैदा करती है | उसके जीवन को धन धन्य आदि सुख प्रदान करती है | धनदा यक्षिणी की साधना मंत्र शाश्तरों में नाना प्रकार से दी हुई है | जीवन में सवर्ण क्षण होते है जब साधक किसी यक्षिणी का सहचर्या प्राप्त करता है | यक्षिणी साधना दुर्लव है पर दुष्कर नहीं यह सहज ही संपन हो जाती है बस इसे समझने की जरूरत है |जो साधक जीवन में धन आदि सुख चाहते है उन्हे यह साधना संपन करनी चाहिए और यह साधना साधक के मन में साधना के प्रति प्रेरणा पैदा करती है |           मैं धनदा यक्षिणी की साधना दे रहा हु आशा करता हु यह साधना आपके जीवन को जरूर नई दिशा देगी इस के लिए साधना के नियमो की पालना करनी अनिवर्य है | यक्षिणी रूप सोंद्र्य से परिपूर्ण होती है यह साधक का काया कल्प तक कर देती है | धनदा यक्षिणी 20 -22 वर्ष की सोंद्र्य की मूर्ति है |इसकी आंखे झील सी गहराई लिए हुई नीली दिखाई देती है | गोर वरणीय मुख के दोनों तरफ दो वालों की वल खाती दो लटाए और लंबी वेणी वालो पे कजरा सा लगाए सुंदर रूप चंद्रमा जैसा जिस सोंद्र्य की आप कल्पना भी नहीं कर सकते उसके वारे अधिक कुश नहीं कह सकता और प्रेम से मन को प्रफुल्त सी करती हुई जब आपके साहमने आती है तो उस वक़्त कैसा मंजर होता है यह आप स्व कर के देख ले | मेरा इस यक्षिणी ने कई वार साथ दिया जब भी जीवन में उदासीन क्षण आए इसने मुझे सँभाला और हमेशा मित्रवत विहार किया जब भी मुझे इसकी सलाह की जरूरत पड़ी एक सच्चे मित्र की तरह मुझे सलाह दी और कई वार ऐसे क्षण आए जब मैंने अपने आपको अकेला सा महसूस किया लेकिन इसने मुझे कभी अकेले पन का एहसास नहीं होने दिया जब भी ऐसा टाइम आया इसको मैंने मेरे कंदे पर अपनी बाजू रखते हुए अपने साथ खड़ी पाया |मैंने कभी इस से धन की लालसा नहीं की लेकिन मेरा कोई कार्य रुका भी नहीं बहुत समय हो गया इस साधना को किए हुये | कुश वर्षो से बेशक मैंने इसे याद नहीं किया फिर भी कभी कभी यह खुद मुझे याद दिला ही देती है | कई वार ऐसे क्षण आए जब यह स्व आके मिली एक दोस्त की तरह | यह बाते हर एक को नहीं बिताई जाती क्यू के यह साधना के निजी अनुभव होते है | जब मैंने यह साधना की थी तो धनदा यक्षिणी स्तोत्र जरूर करता था साथ में | तभी एक दिन एक सोंद्र्य की मूर्ति मेरे साहमने अचानक आ गई और जिसे देखते ही आदमी अपने होश तक खो देता है पर मैंने हमेशा इन शक्तिओ से मित्रवत ही रहा हु और  शुद्ध प्रेम पूर्ण ही रहा हु | बस अंत जही कहुगा का के जीवन में अगर प्रेम की परिभाषा अगर समझनी है तो आप यक्षिणी का सहचर्या प्राप्त करे | सद्गुरु आपको सफलता प्रदान करे |

विधि –
१. यह साधना 21 दिन की है | 21 दिन में स्वा लाख मंत्र जप जरूरी है | 
२. इसके लिए दो सामग्री  यक्षिणी  यंत्र और यक्षिणी माला  | अगर सामग्री न हो तो इसे करने के लिए एक लाल वस्त्र पे यक्षिणी की नारी रूप की सुंदर तस्वीर बना कर अथवा मूर्ति आदि बना कर भी की जा सकती है यह साधको को सुविदा के लिए बता रहा हु जा आप सफटिक या  पारद  श्री यंत्र पे भी इसका प्रयोग कर सकते हैं | माला अगर यक्षिणी माला न हो तो लाल चन्दन की माला श्रेष्ठ रहती है |
  ३. वस्त्र पीले अनसिले पहने  मतलव आप पीली धोती और पीतांबर ले सकते है |
  ४. दिशा उतर ठीक है |
  ५. मंत्र जप २१ दिन में स्वा लाख करना है |
  ६. गुरु जी और गणेश जी का पंचौपचार पूजन करे साधना के लिए अनुमति ले फिर यक्षिणी यंत्र जो के अपने साहमने एक बेजोट पे पीला जा लाल वस्त्र विशा के स्थाप्त करना है उसका पूजन करे | पूजन में धूप, दीप , फल, फूल, अक्षत, नवेद आदि के लिए मिठाई जो दूध की बनी हो और इतर आदि चढ़ा कर पुजा करे |
  ७. पूजन के बाद आप गुरु मंत्र जाप ५ माला कर ले तो बेहतर है नहीं तो २ माला  पहले और २ माला बाद में कर ले |
  ८. घी का दीपक पुजा काल के दोरान जलता रहे | सुगंध आदि के लिए अगरवती आदि लगा दे |फिर आप मंत्र जाप करे और जप पूर्ण होने पर जप समर्पित सद्गुरु जी अथवा यक्षिणी यंत्र पे भी कर सकते है |
  ९. साधना शुरू करने से पहले कुबेर देवता का पूजन अवश्य करे इस से साधना में सफलता की सभावना बढ़ जाती है |

मंत्र – 

|| ॐ धं ह्रीं श्रीं रतिप्रिये स्वाहा || 

यह नौ अक्षर का मंत्र है इसका स्वा लाख जप करने से साधक को शीर्घ ही सिद्धि प्राप्त होती है |इस यक्षिणी विशेष मंत्र की आराधना से घर की दरिद्रता दूर हो जाती है | अनेक भूमि गत द्रव्य की प्राप्ति भी होती है ऐसा शाश्तर कथन है |

 

पिशाच बताते हैं भविष्य

पिशाच या भूत सिर्फ डराने का ही काम नहीं करते बल्कि ये आपका भूत, भविष्य और वर्तमान भी बता सकते हैं। पिशाच या भूत से भविष्य जानने की विद्या प्राचीन काल से ही चली आ रही है। पुराने समय में भी पिशाच को मंत्रों द्वारा आमंत्रित किया जाता था और फिर उनसे संबंधित व्यक्तियों के भविष्य आदि की जानकारियां प्राप्त की जाती थी।

सनातन धर्म के अनुसार ऐसी शक्तियों को पराशक्तियां कहा जाता है। इनकी एक अलग ही दुनिया होती है। यक्षिणी, योगिनी, परी, कालभैरव, कर्णपिशाचिनी, छायापुरुष के नाम से जानी जाने वाली शक्तियां पराशक्तियों की श्रेणी में आती हैं। 
पराशक्तियां उनकी उपासना करने वाले व्यक्ति से यदि प्रसन्न हो जाए तो उस साधक के लिए वे कुछ भी कर सकती हैं। साधक की चाहे जो मनोकामना हो ये पराशक्तियां उसे पूरा करने समर्थ होती हैं। ये शक्तियां किसी भी व्यक्ति के बारे में कुछ भी बता सकती है। इस विद्या में साधक मंत्रों की शक्ति से किसी विशेष पिशाच को आमंत्रित करता है यह पिशाच किसी व्यक्ति में शरीर में प्रविष्ट हो जाता है और अन्य लोगों के जीवन की भविष्य में होने वाली सारी घटनाओं के बारे सटिक जानकारी दे देता हैं। साथ ही ये पिशाच साधक की भौतिक इच्छाओं को पूरी करने में समर्थ होते हैं।

अदृश्य बला से मुक्ति

कभी-कभी व्यक्ति का चौराहे पर रखी हुई वस्तु पर पैर पड़ जाता है या लाग हो जाती है या कोई व्यंतर आत्मा का शरीर से स्पर्श हो जाता है अथवा प्रेतात्मा आदि का साया पड़ जाता है तो व्यक्ति तुरंत अस्वस्थ हो जाता है। वह पागलों जैसी हरकतें कर सकता है, ज्वर से पीड़ित हो सकता है, उसका खाना-पीना छूट सकता है। इन सब कारणों का निदान चिकित्सकों के पास नहीं होता, इनका उपचार सिर्फ टोटकों द्वारा ही संभव होता है।

यह टोटका निम्न प्रकार से किया जाता है-

* सबसे पहले गाय के गोबर का कंडा व जली लकड़ी की राख को पानी से भिगोकर एक लड्डू बनाएँ।

* इसके बाद इसमें एक सिक्का गाड़ दें।

* फिर उस पर काजल और रोली की सात बिंदी लगा दें।

* तत्पश्चात्‌ लोहे की एक कील उसमें गाड़ दें।

* अब उस लड्डू को अस्वस्थ व्यक्ति के ऊपर से सात बार उतारकर चुपचाप नजदीक के किसी चौराहे पर रख आएँ।

* आते-जाते समय किसी से बातचीत न करें तथा पीछे मुड़कर भी न देखें। इस क्रिया से रोगी बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएगा।

 

दूसरा प्रयोग :

* झाडू व धान कूटने वाला मूसल अस्वस्थ व्यक्ति के ऊपर से उतारकर उसके सिरहाने रख दें।

* अपने बाएँ पैर का जूता अस्वस्थ व्यक्ति के ऊपर से सात बार उतारकर (घुमाकर) प्रत्येक बार उल्टा जूता जमीन पर पीटें।

* सात ही बार वह जूता उस व्यक्ति को सुँघाएँ, इस प्रक्रिया से भी अस्वस्थ व्यक्ति ठीक हो जाएगा।

 किसी भटकती आत्मा की लाग

* यदि किसी व्यक्ति को किसी भटकती आत्मा (शाकिनी, प्रेतनी) की लाग हो गई हो तो गंधक, गुग्गुल, लाख, लोबान, हाथी दाँत, सर्प की केंचुली व पीड़ित व्यक्ति के सिर का एक बाल लेकर सबको मिलाकर व पीसकर जलाएँ तथा उसका धुआँ रोगी को दें। इससे व्यक्ति पर से लाग हट जाती है।

देवीय शक्ति से साक्षात्कार कराते मंत्र

मंत्रों का प्रयोग मानव ने अपने कल्याण के साथ-साथ दैनिक जीवन की संपूर्ण समस्याओं के समाधान हेतु यथासमय किया है और उसमें सफलता भी पाई है, परंतु आज के भौतिकवादी युग में यह विधा मात्र कुछ ही व्यक्तियों के प्रयोग की वस्तु बनकर रह गई है।

मंत्रों में छुपी अलौकिक शक्ति का प्रयोग कर जीवन को सफल एवं सार्थक बनाया जा सकता है। सबसे पहले प्रश्न यह उठता है कि 'मंत्र' क्या है, इसे कैसे परिभाषित किया जा सकता है। इस संदर्भ में यह कहना उचित होगा कि मंत्र का वास्तविक अर्थ असीमित है। किसी देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए प्रयुक्त शब्द समूह मंत्र कहलाता है। जो शब्द जिस देवता या शक्ति को प्रकट करता है उसे उस देवता या शक्ति का मंत्र कहते हैं। मंत्र एक ऐसी गुप्त ऊर्जा है, जिसे हम जागृत कर इस अखिल ब्रह्मांड में पहले से ही उपस्थित इसी प्रकार की ऊर्जा से एकात्म कर उस ऊर्जा के लिए देवता (शक्ति) से सीधा साक्षात्कार कर सकते हैं।

ऊर्जा अविनाशिता के नियमानुसार ऊर्जा कभी भी नष्ट नहीं होती है, वरन्‌ एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती रहती है। अतः जब हम मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो उससे उत्पन्न ध्वनि एक ऊर्जा के रूप में ब्रह्मांड में प्रेषित होकर जब उसी प्रकार की ऊर्जा से संयोग करती है तब हमें उस ऊर्जा में छुपी शक्ति का आभास होने लगता है। ज्योतिषीय संदर्भ में यह निर्विवाद सत्य है कि इस धरा पर रहने वाले सभी प्राणियों पर ग्रहों का अवश्य प्रभाव पड़ता है।

चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और यह पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण खगोल में अपनी स्थिति के अनुसार मानव मन को अत्यधिक प्रभावित करता है। अतः इसके अनुसार जो मन का त्राण (दुःख) हरे उसे मंत्र कहते हैं। मंत्रों में प्रयुक्त स्वर, व्यंजन, नाद व बिंदु देवताओं या शक्ति के विभिन्न रूप एवं गुणों को प्रदर्शित करते हैं। मंत्राक्षरों, नाद, बिंदुओं में दैवीय शक्ति छुपी रहती है।

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Note - नीचे मंत्र साधनायें लिखी गई है कोई भी मंत्र साधना पढ़ने के लिये उस मंत्र पर क्लिक करे ☟

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